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साक्षी भाव का क्या अर्थ है। अगर आप जिंदगी में सफल बनना चाहते हो तो। इसे जानने की जरूरत है।

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शरीर के प्रति Sakshi होना बहुत ही आसान है। आपके भीतर की चेतना आपसे अलग है। जेसे की अगर आप अपना हाथ उठा रहे हो। तो भीतर एक चेतना है जो की देख रही है की आप अपना हाथ उठा रहे हो।,जब आप रस्ते पर चल रहे हो तो भीतर आपके कोई देख रहा है। की आप चल रहे हो। 24 घंटे आपके भीतर एक बिंदु है। जो आप पर नजर रखे है। पर आपको उसका बोध नही।Sakshi भाव का अर्थ होता है की उस बिंदु पर नजर रखना। जेसे जैसे आप उस बिंदु के प्रति सजक होये गे। वैसे वैसे आप देखेगे की आपकी Awareness का Level बहुत अच्छा होता जायेगा।

समय के साथ आप अपनी नींद के प्रति भी साक्षी रहने में Saksham हो जाओगे। सोते समय भी आपको पूरा होश होगा। की आपके इर्द गिर्द क्या हो रहा है। आप के सोते समय भी अंदर कुछ जागा होता है। जेसे की आप कभी सोने से पहले अपना नाम लेकर कहना की मुझे सुबह 5 बजे उठा देना। आप चकित होंगे की ठीक 5 बजे आपकी आँख खुल जाए गई। एक और उद्धरण है। जेसे की आप कहि बहुत भीड़ बाली जगह पर पड़े हो। अगर कोई आपके बगल पड़े व्यक्ति का नाम लेकर पुकारे तो आप निशिंत होकर लेटे रहो गए। आपको कुछ भी Ehsas नही होगा। अगर बह आपका नाम ले तो आप तुरंत उठ जाओ गे। इससे पता लगता है की कोई आपके भीतर है जो जागा हुआ है।

आप इस बात से हैरान होंगे की अगर किसी ब्यक्ति को सम्मोहित करके मूर्छित कर दिया जाये। और उसे कह दिया जाये की 15000 minutes बाद तुम ऐसा ऐसा काम करना। फिर बाद में भी ब्यक्ति चेतन अवस्था में बापिस आ जाये गा। और ठीक 15000 minutes बाद वो बही काम करेगा । जो उसे करने के लिए कहे गए थे। उस व्यक्ति के भीतर कोई जागा हुआ है। जिसे मिनट-मिनट का हिसाब है। आपके अंदर का बिंदु Sakhsi बिंदु है। इसलिए जिसका Sakhsi जग जाता है। बह रात को सोते हुए भी नही सोता।बह चेतन अवस्था में रहता है। Mahatma Budh के संभन्ध में कहा गया है। की वो रात्रि जिस करवट में सोते थे । सारी रात उसी करवट में रहते थे। शरीर का जो अंग जहा होता भी रहता। सोते समय उनका कोई भी अंग नही हिलता था। जब उनके शिष्य आनंद ने उनके ना हिलने का कारण पूछा तो उन्होंने कहा की में स्मृति पूर्वक सोता हु। होश से सोता हु।

इसलिए मेरे शरीर के अंग अपने आप नही हिल सकते। जब तक में ना चाहू मेरे अंग तब तक नही हिलेगे। अब तो हमें Sakhsi भाव का कुछ नही पता। जब हमे क्रोध आता है। तब हम क्रोध कर लेते है। करने के बाद हमे क्रोध का ख्याल आता है।किसी की हत्या करने के बाद हमे होश आता है की। ये मेने क्या कर दिया। ये सब तब होता है। जब हम मोर्चा में होते है। हमारे अंदर Sakhsi भाव का जन्म नही होता। Sakhsi भाव के बगैर हमारा जीवन जानवर के सामान है।

Sakhsi भाव को जन्म देने के लिए। हमे अपने दिन की साडी क्रियाओ के प्रति सचेत रहना होगा। जैसे की हम खाना खा रहे है। निवाला मुख में जा रहा है। हम चल रहे है। हमारा दाहिना पैर आगे जा रहा है। बाद में बाये वाला पैर आगे जा रहा है। इस प्रकार अपनी क्रइयो को सजगता से देखते हुए आप Sakhsi भाव को धीरे धीरे पा लोगे।

 211 ने देखा Oct 14, 2019 
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